रविवार, 6 दिसंबर 2015

" सपनों की क्या बात करें"



सपनों की क्या बात करें...

जो मिला नियति से,
उसको लें हथियार बना, 
अवनति से,
दो दो हाथ करें, 
सपनों की क्या बात करें...

जो चलते है तलवारों पर, 
उनको असिधारों से क्या डर, 
कर्मप्राँगण में आओ,
ना रहो,
हाथ पर हाथ धरे,
सपनों की क्या बात करें...

विगतागत को साथ लिए सब, 
किसी शत्रु से नहीं डरो अब, 
विजय करो तुम,
ताकि रहें सब,
खुशहाली के पात हरे,
सपनों की क्या बात करें...

हर क्षण जीवन का, एकांकी,
पल भर की बस मिथ्या झांकी, 
तब जियें मृत्यु तक,
ऐसे हम, 
कि हर क्षण हों आभार भरें,
सपनों की क्या बात करें...



नियति = Destiny 
अवनति=  Regress 
असिधार= Blade of sword 
कर्मप्राँगण= Field of  activities  (figurative )
विगतागत= Past & future
शत्रु= Enemy
मिथ्या= False
झांकी= Glimpse
मृत्यु= Death
आभार= Gratitude 


{ २००९  में लिखी मेरी कविताओं में से एक}
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