बुधवार, 11 दिसंबर 2013

Lov U OSHO. :)




"जीवन में जो खिल उठा है फूल की तरह
उसके लिए प्रकट आभार तो कर लूं ,

जिसके परिमल की पवन में उड़ती हूँ फिरती
उससे आज प्यार का इज़हार तो कर लूं ,

उसके दिए हुए 'रौशनी के दिए' में सकूं चल
और मोहब्बत का नज़राना भी क्या दूं मैं उसे,

हाँ, चलूंगी तो द्वार उसके पर जरा ठहर
कुछ होश के कणों का श्रृंगार तो  कर लूं ".

Happy b'day OSHO.
:)
Many many Happy returns of this day will blossom my consciousness, fulfill my heart & enriched my life.

Lov U OSHO.

"तुमको देखा तो  ये ख्याल आया
जिंदगी धूप तुम घना साया"
:)

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