शुक्रवार, 10 अगस्त 2012

" समय के बहाव में "



डूबेगी
तो कभी
तैरेगी लहरों पर
जीवन की नौका
इस कर्मक्षेत्र सागर में,

और भावना के ज्वार  भी आते ही रहेंगे;

समय के 
बहाव में
स्म्रतियों के गाँव में
उम्र गुजर जानी  है
संवेदनों की छाव में, 

कुछ क्षणों के ठहराव  भी आते ही रहेंगे;

कितना भी
बहला लो 
दिल को तुम बार बार 
सपनों के किरचे
तो चुभने  ही चुभने हैं

कुछ काश...ताउम्र याद  आते ही रहेंगे;

जटिल हैं
अथक ये
जीवन की राहें
कुछ मोड़ों पर मिलन और
विछोह की होगी कसक

कुछ दोराहे हमेशा तड़पाते  ही रहेंगें.