Poetry--




Poetry is just the evidence of life. If your life is burning well, poetry is just the ash.



18/03/2012

ये बात और है

मै नहीं चाहती 
कि 
कभी चाहो तुम मुझे, 
ये बात और है 
कि प्रेम है तुम्हें मुझसे 
और
ये बात और है 
कि
चाहते हो तुम मुझे
क्योंकि प्रेम तो शाश्वत है 
आकाश कि तरह 
पर चाहतें तो व्यर्थ हो जाती हैं 
पूरी होते ही.




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तुम चाहो 
तो मै घटा बन जाऊ 
और बरसूँ इतना कि  
भीग सको तुम 
जीवन से,
प्रेम से...
और मै चाहूं तो
व्र्क्ष बन जाओ तुम,
सुकून के पल हों 
मेरे हिस्से 
जिसकी छांव के तले, 
पर थोड़ा संभालना 
ताकि मै 
तुम्हारे 
होने की वजह न बन जाऊ
और तुम 
मेरे जीने की वजह न बन जाओ.

22 टिप्‍पणियां:

  1. प्रेम के भावों की सुन्दर अभिव्यक्ति .

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  2. चाहत और वजह..अत्यन्त मौलिक भाव बताती कविता।

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  3. आपकी कविता अच्छी लगी. प्रेम का उद्दात्त चित्रण, खलील giबरान की याद दिलाता हुआ.... बहुत सुन्दर

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  4. दोनों रचनाएँ बहुत अच्छी लगीं .... सुंदर अभिव्यक्ति

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  5. मै
    तुम्हारे
    होने की वजह न बन जाऊ
    और तुम
    मेरे जीने की वजह न बन जाओ.

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  6. बेहद खूबसूरती से लफ़्ज़ों को सजाया है आपने रश्मि... बेहतरीन!

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  7. पर थोड़ा संभालना
    ताकि मै
    तुम्हारे
    होने की वजह न बन जाऊ
    और तुम
    मेरे जीने की वजह न बन जाओ

    ...बहुत खूब! बहुत सुंदर भावमयी रचनाएँ...

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  8. best line...
    चाहतें तो व्यर्थ हो जाती हैं
    पूरी होते ही...

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  9. प्रेम रस से परिपूर्ण सुंदर अभिव्यक्ति....

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  10. Na chah thi samundr ki 
    Na dariya ki chah thi 
    Mil jati agr bas ek bund 
    Uske ankho se baris ki
    Bujh jati uthi.jo jnmo ki pyas thi
    Takrata agr pthr se bhi 
    Vo bhi to gila hota 
    Khusi me na shi vo mere gm se hi pighla hota 
    na gm ha ki vo muje chod gyi bus gm ha to is bat ka ki registan me ansoo bahau kase Milega use mere ansuo 
    Ka nissa bhi nhi 
    Dil ki us lgi me ankho ko rulau kaise
    Use pane ki aas na thi muje pr vo janti thi mujko bhi kisi ko batau kaise Drd se kya hal ha is dil ka
    ab ansuo ne bhi sath choda to dikhau kaise
    Ruthe vo is kdr hamse
    ki apna gussa jtate bhi nhi . to unko manau kaise
    Apne paro me bhi jgh na di jisne usk raste ke phool. Bn pau kase Baris ki to khwahis na thi bin ansoo is dil
    ki aag mitau kaise

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    1. Sorry di apke prfiie me bina puche apni bekr si poem. Likhne ke liye bt i like yr poemss

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