रविवार, 21 अक्तूबर 2012

तुम्हारे जाने के बाद भी...

तुम्हारे जाने के बाद भी

निकले हैं सूरज,
खिली है धूप,
आया है वसंत,
मुस्कुराएँ हैं फूल,
और गुनगुनाते रहें हैं भौरें,
पर
तुम नहीं हो
तो चटख नहीं है धूप,
उदास है  वसंत,
थोडा रुआंसे हैं फूल,
और  भवरें गुनगुनाते हैं
कभी-कभी 
किन्हीं 
नामालुम उदासियों के गीत;

तुम चले गए  हो
तो भी
राहें वैसी ही चल रही हैं, 
पगडंडियों में वही धूल है, 
सवेरा भी होता है,
रात भी आती है,
संसार की वैसी ही है धुन
पर
तुम्हारे न होने से
दिशाएं खो गयी हैं  राहों की, 
धूल के बड़े हो गए हैं  गुबार,
उतना उत्साह नहीं सवेरों में,
रातों का चाँद भी
कहीं खोया-खोया सा है,
संसार की हर धुन है
गुमसुम,
और किन्हीं  अर्थों में 
ज़रा मायूस है जिंदगी।



शुक्रवार, 10 अगस्त 2012

" समय के बहाव में "



डूबेगी
तो कभी
तैरेगी लहरों पर
जीवन की नौका
इस कर्मक्षेत्र सागर में,

और भावना के ज्वार  भी आते ही रहेंगे;

समय के 
बहाव में
स्म्रतियों के गाँव में
उम्र गुजर जानी  है
संवेदनों की छाव में, 

कुछ क्षणों के ठहराव  भी आते ही रहेंगे;

कितना भी
बहला लो 
दिल को तुम बार बार 
सपनों के किरचे
तो चुभने  ही चुभने हैं

कुछ काश...ताउम्र याद  आते ही रहेंगे;

जटिल हैं
अथक ये
जीवन की राहें
कुछ मोड़ों पर मिलन और
विछोह की होगी कसक

कुछ दोराहे हमेशा तड़पाते  ही रहेंगें.

रविवार, 15 जुलाई 2012

दो- चार लिखकर शब्द,
और फिर
ठिठकती अपनी कलम से 
कहा मैंने 
ऐ सहृदय !
तू तो न बन निष्ठुर 
कि पहले से ही 
निष्ठुर है समूचा जग, 
मत छीन  मुझसे 
आश्रय मेरा, तू प्यारी इस तरह

तू है 
तो कुछ कहना मेरा संभव 
तू है
तो कुछ  रहना मेरा संभव 

तू है तो ही अस्तित्व मेरा 
समझती हूँ मै  
तेरे लिए ही  भावना के 
द्वार पर हूँ 

जीवन मेरा यदि कल्पना का वृत्त 
तो तू परिधि उसकी 
जीवन मेरा यदि एक रूठा स्वप्न 
तो तू सुरति  उसकी 

सहस्त्रों अश्रुओं की
बूँद को अक्षर बनाकर 
पंक्तियाँ दर पंक्तियाँ 
तूने  सजायीं 
और मुस्कुराहटों का 
जरा सा रंग लेकर 
कुछ खुशनुमा  लम्हों की 
सुन्दर अल्पना तूने  बनायी

प्रिय!
असीमित सुखों के वरदान 
अस्वीकार मुझको 
मगर न तुझे खोना, 
तू है तो हूँ आश्वश्त मै
कि  मौन होना है मेरा संभव
मगर न मूक होना।  

रविवार, 18 मार्च 2012

ये बात और है

मै नहीं चाहती 
कि 
कभी चाहो तुम मुझे, 
ये बात और है 
कि प्रेम है तुम्हें मुझसे 
और
ये बात और है 
कि
चाहते हो तुम मुझे
क्योंकि प्रेम तो शाश्वत है 
आकाश की तरह 
पर चाहतें तो व्यर्थ हो जाती हैं 
पूरी होते ही.




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तुम चाहो 
तो मै घटा बन जाऊ 
और बरसूँ इतना कि  
भीग सको तुम 
जीवन से,
प्रेम से...
और मै चाहूं तो
व्र्क्ष बन जाओ तुम,
सुकून के पल हों 
मेरे हिस्से 
जिसकी छांव के तले, 
पर थोड़ा संभालना 
ताकि मै 
तुम्हारे 
होने की वजह न बन जाऊ
और तुम 
मेरे जीने की वजह न बन जाओ.

शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2012

तुमने कहा- रोना मत

समय के कुछ टुकड़ों से 
बेपनाह मुहब्बत है मुझे, 

ये वही टुकड़े हैं 
जो कभी 
तुमने मेरे लिए जिए 
या मैंने  तुम्हारे लिए
अब चाहती तो हूँ कि
तू मेरे पास रहे ,
पर कैसे मै,
जाने भी न दूं तुझे;

ह्रदय एक झील था अब  तक  
अब नदी है अल्हड़
किसी सागर के लिए
अधैर्य है थोडा
फिर भी न चाहूंगी कि
तू कभी
मेरे लिए भी झुके,

तेरी उनींदी आखों में
देखूं खुद को
तो सब होश खो जाते हैं
और तू अगर छू  ले
तो मेरे लम्हें
सब रह जाते हैं रुके;


तुम यहाँ
मुझमे रह जाओगे
और मै वहां तुझमे
इसलिए
तुम जाओ इसके पहले
क्षणों में जला दो 
ऐसा दीपक
जो कभी न बुझे,

तुमने कहा- रोना मत
तो पलकों के मोती
आखों की सीप में
बंद ही रखूंगी
पर कहो कैसे
मै  यूँ ही
विदा  दूं तुझे,

समय के कुछ टुकड़ों से
बेपनाह मुहब्बत है मुझे
















बुधवार, 4 जनवरी 2012

I will still keep the “hope”


Flowers are not blossoming
Leaves are
not green now a days
Season is so much foggy, I see..
And sky is covered with
Undesired clouds
But,
I will still keep the “hope”;


What I want to say
You never hear
What I want to listen
You never say
Time is taking too much time
And it may be too long
But,
I will stay forever for "you";


Moments are flying, I feel
But my days are
much hard to pass
Why?
what I don’t
want to remember
Became the
slideshow ongoing forever
May be its too much
for pain too
But,
I will still tolerate whatever it;


I will have much better lives
Or I am going to die in better way
I don’t know
What my destiny keep for me..
But
I know, what I have in my hands
and how it will take the best shape,
that's why
I will ever ready to move on..