शनिवार, 24 दिसंबर 2011

आज बहुत मिस कर रही हूँ तुम्हें,

आज, 
बहुत मिस कर रही हूँ तुम्हें,

सवेरे कहा था सूरज से
कि मुझे
तुम्हारे हाल-चाल दे
क्योंकि
एक वही तो है सिर्फ
जो एक साथ
मेरे करीब भी है
और तुम्हारे भी,
पर जाने
कहाँ रह गया वह,
फिर ये facebook के
updates भी तो असली खबर नहीं देते;
कहलवाया था उस से तुम्हें
GoOd  MoRnINg भी
शायद 
महसूस किया हो तुमने
जब उसकी किरणों ने
स्पर्श किया होगा तुम्हें;

शब्दों क़ी
भले ही टूट गयी हों
श्रंखलायें
पर वे सारी मासूम इबारतें
जो तुमने 
(भूल से ही सही)
लिखी थी
सिर्फ मेरे लिए
यथावत हैं
मेरे जेहन में
तुम्हारे लिए
मेरी अनगिन कविताओं कि तरह;

सुनो,
आज बहुत मिस कर रही हूँ तुम्हें,

कभी-कभी 
ऐसा क्यूँ हो जाता है कि
कोई पास होते हुए भी दूर होता है
और कोई दूर होते हुए भी  
दूर नहीं होता,
कई सारे काश
उठते रहते हैं हृदय में
हर पल,
इसलिए हृदय की
हर हलचल से
डर लगता है अब
जाने कब क्या चाह ले
क्योंकि
जानती हूँ मै  
कि अब
कुछ भी नहीं दे सकती हूँ  इसे   ..

तुम कह सकते हो कि  
हृदय से
दुनिया नहीं चलती
पर बताओ मुझे कि
हृदय के बिना दुनिया है ही क्या..
कभी सुना था
आज जान रही हूँ
कि इंसान होना कितना मुश्किल है
खैर...
ये सब  छोडो
अभी तो बस,
इतना ही कहने को जी करता है
कि आज, बहुत...  
"बहुत मिस कर रही हूँ तुम्हें",