मंगलवार, 27 जुलाई 2010

मै जरा सा इंतजार और करना चाहती हू ;
जिन उड़ानों के लिए है
स्वप्न मेरे ;
मै उन्ही के लिए दो पल
को ठहरना चाहती  हू ; मै जरा सा .......
ख्यालो का हुनर लेकर
गढ़ सकू कुछ खूबसूरत
कर सकू ये पूर्ण वादा
इसलिए कुछ और वादों से मुकरना चाहती हू ; मै जरा सा ......
तपन के ही बाद
होता है खरा कुछ
हो सके  कुछ खरा सोना
इसलिए मै जिंदगी की आग से होकर गुजरना चाहती हू ; मै जरा सा ....