Poetry--




Poetry is just the evidence of life. If your life is burning well, poetry is just the ash.



07-10-2010

'एक वही बूँद ही बरसता नहीं'

एक गह्वर है ,जो भरता नहीं ;
सिमटकर लम्हे
मेरी मुट्ठी में है 
और रेत के माफिक 
फिसल रहे हैं 
सच है ,
वक़्त कभी ठहरता नहीं ;
एक गह्वर है ,जो भरता नहीं ;


विवशता की कंदीलों में 
साफ दिखते है
जिंदगी के चाँद पर धब्बे 
दिन छुपा देता है सबकुछ 
पर कभी कुछ निखरता नहीं ;
एक गह्वर है ,जो भरता नहीं ;

कसक है बस इतनी 
की असंख्य बारिशें  हो जाती हैं 
सावन में , पर सीप 
जिस बूँद की प्रतीक्षा में होती है 
एक वही बूँद ही बरसता नहीं;
एक गह्वर है ,जो भरता नहीं ......

18 टिप्‍पणियां:

  1. सभी ही अच्छे शब्दों का चयन
    और
    अपनी सवेदनाओ को अच्छी अभिव्यक्ति दी है आपने.

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  2. best lines..
    कसक है बस इतनी
    की असंख्य बारिशें हो जाती हैं
    सावन में , पर सीप
    जिस बूँद की प्रतीक्षा में होती है
    एक वही बूँद ही बरसता नहीं;
    एक गह्वर है ,जो भरता नहीं ......

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  3. "साफ दिखते है
    जिंदगी के चाँद पर धब्बे "-
    पता नहीं आप को अंदाजा है की नहीं, या हिंदी कविता के ठेकेदार मानेंगे या नहीं पर मेरी अपनी जानकारी में ये लाइने हिंदी कविता में एकदम ताजी हैं , और अदभुद भी, बधाई हो, मुझे जादा लेखन का पता नहीं है पर जो भी आप ने लिखा है बहुत स्तरीय है , और हाँ बहुत अन्दर तक छू सकने में समर्थ भी !!!
    साथ ही साथ मेरा धन्यवाद् आप का मेरे ब्लॉग पर आने के लिए मैं वैसा राईटर - वाईटर नहीं हूँ बस जो मन में रहता है लिख देता हूँ फिर भी आप को अच्छा लगा जान कर खुस हूँ!

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  4. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना 12 -10 - 2010 मंगलवार को ली गयी है ...
    कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  5. धन्यवाद आप सभी को...
    और संगीता जी खासकर आपको की आपने मेरे रचनाकर्म को इतनी महत्ता दी.
    वैसे मेरे एक्साम्स और फिर उसके बाद सेमेस्टर ब्रेक की छुट्टियो में घर जाने की वजह से करीब २ सप्ताह ब्लॉग लेखन और पठन दोनों से दूर रहना पड़ेगा .. जो थोडा कसक भरा होगा मेरे लिए....
    लेकिन वापिस आइ. आइ . टी .roorkee आने के बाद आप सबके प्रोत्साहन की वजह से तितर - बितर लेखन को एक व्यवस्थित रूप देना चाहूंगी ............
    again a lot of thanx :)

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  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति………………

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  7. चर्चा मंच में आना तुम्हारी लेखनी अपनेआप सिद्ध करता है..मुझे देख कर सच में बहुत सुकून हुआ..ऐसा लगा जैसे मुझे ही ईनाम मिला हो..लड़की तुम्हे बड़ो का आशीर्वाद मिला है..खुद को जानने की और उससे आगे बढ़कर व्यक्त करने की क्षमता मिली है..परमपिता को धन्यवाद दो..और ऐसे ही कर्मक्षेत्र में आगे बढ़ते रहो..

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  8. कसक है बस इतनी
    की असंख्य बारिशें हो जाती हैं
    सावन में , पर सीप
    जिस बूँद की प्रतीक्षा में होती है
    एक वही बूँद ही बरसता नहीं;
    बाढ़ में डूबता हुआ, प्यासा मर जाता है ...
    सुन्दर .. अत्यंत सुन्दर रचना

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  9. की असंख्य बारिशें हो जाती हैं
    सावन में , पर सीप
    जिस बूँद की प्रतीक्षा में होती है
    एक वही बूँद ही बरसता नहीं;
    एक गह्वर है ,जो भरता नहीं.
    इतना गहरा और सुन्दर लिखा है आपने कि कुछ पंक्तिय स्वत: ही आ गई ज़हन में -
    "हजारों चिराग जले हैं राहों में
    मेरे घर का दिया ही जलता नहीं" .

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  10. विवशता की कंदीलों में
    साफ दिखते है
    जिंदगी के चाँद पर धब्बे ....

    दिल को छू लेनेवाली बहुत सुन्दर प्रस्तुति...शुभकामनायें...

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  11. mumma ne charchamnch par charcha ki ...waheen se khincha hua yahaan chala aayaa.... behtareen shabd chunaw hai aap ka .....nayapan laane kee koshish saaf dikhati hai aap ki ...sambhavna hai aap ke kavita me

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  12. लेखन के लिये “उम्र कैदी” की ओर से शुभकामनाएँ।

    "आपने वाकई बहुत अच्छा लिखा है!"

    जीवन तो इंसान ही नहीं, बल्कि सभी जीव जीते हैं, लेकिन इस समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, मनमानी और भेदभावपूर्ण व्यवस्था के चलते कुछ लोगों के लिये मानव जीवन ही अभिशाप बन जाता है। अपना घर जेल से भी बुरी जगह बन जाता है। जिसके चलते अनेक लोग मजबूर होकर अपराधी भी बन जाते है। मैंने ऐसे लोगों को अपराधी बनते देखा है। मैंने अपराधी नहीं बनने का मार्ग चुना। मेरा निर्णय कितना सही या गलत था, ये तो पाठकों को तय करना है, लेकिन जो कुछ मैं पिछले तीन दशक से आज तक झेलता रहा हूँ, सह रहा हूँ और सहते रहने को विवश हूँ। उसके लिए कौन जिम्मेदार है? यह आप अर्थात समाज को तय करना है!

    मैं यह जरूर जनता हूँ कि जब तक मुझ जैसे परिस्थितियों में फंसे समस्याग्रस्त लोगों को समाज के लोग अपने हाल पर छोडकर आगे बढते जायेंगे, समाज के हालात लगातार बिगडते ही जायेंगे। बल्कि हालात बिगडते जाने का यह भी एक बडा कारण है।

    भगवान ना करे, लेकिन कल को आप या आपका कोई भी इस प्रकार के षडयन्त्र का कभी भी शिकार हो सकता है!

    अत: यदि आपके पास केवल कुछ मिनट का समय हो तो कृपया मुझ "उम्र-कैदी" का निम्न ब्लॉग पढने का कष्ट करें हो सकता है कि आपके अनुभवों/विचारों से मुझे कोई दिशा मिल जाये या मेरा जीवन संघर्ष आपके या अन्य किसी के काम आ जाये! लेकिन मुझे दया या रहम या दिखावटी सहानुभूति की जरूरत नहीं है।

    थोड़े से ज्ञान के आधार पर, यह ब्लॉग मैं खुद लिख रहा हूँ, इसे और अच्छा बनाने के लिए तथा अधिकतम पाठकों तक पहुँचाने के लिए तकनीकी जानकारी प्रदान करने वालों का आभारी रहूँगा।

    http://umraquaidi.blogspot.com/

    उक्त ब्लॉग पर आपकी एक सार्थक व मार्गदर्शक टिप्पणी की उम्मीद के साथ-आपका शुभचिन्तक
    “उम्र कैदी”

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  13. "कसक है बस इतनी
    की असंख्य बारिशें हो जाती हैं
    सावन में , पर सीप
    जिस बूँद की प्रतीक्षा में होती है
    एक वही बूँद ही बरसता नहीं;
    एक गह्वर है ,जो भरता नहीं ......"

    संवेदनशील और सुंदर रचना. आभार.
    सादर
    डोरोथी.

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  14. रश्मि जी,
    आप बराबर अच्छा लिखे जा रही हैं लेकिन इधर कुछ दिनों से ज्यादा व्यस्त होने की वजह से ध्यान नहीं दे पा रहा हूँ... मुआफी मांग सकता हूँ और क्या....

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