मंगलवार, 5 अक्तूबर 2010

मै पूछना चाहती हू दोस्तों !

मै पूछना चाहती हू दोस्तों !
क्यों इस कदर और इस हद तक 
हँसाते हो मुझे,
गर कभी रोना पड़ा तो
 क्या करुँगी .......................
आज की ये हकीक़त  है
 बहुत प्यारी 
फ़साना पर जब बनेगी
नहीं होगे पास तुम सब 
और फिर ये जिंदगी 
लम्बी लगेगी 
क्या करुँगी.....................


 चमन सी है जिंदगी 
गुलजार अपना वक़्त है
मोहब्बत है, बिलावजह के कभी झगडे
और फिर नाराजगी
सोचती हूँ
फिर कभी जब बिन वजह ही 
झगड़ने का 
मन करेगा 
क्या करुँगी ..........


प्रीत के बंधन अभी है 
एक दिन पर सब अलग हो जायेंगे 
फिर कहा पर भला किसको पाएंगे
मसरूफ होंगे सभी 
अपने फसानों में 


वक़्त की फिरकी 
मगर जब भी चलेगी
याद आओगे बहुत सब 
क्या करुँगी...............
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