गुरुवार, 30 सितंबर 2010

जिनके लिए झगड़ रहे हो मेरे दोस्तों!

कोई हिन्दू तो कोई मुसलमान क्यों है
मंदिर-मस्जिद के लिए सब इतना परेशान क्यों है 


जिनके लिए झगड़ रहे हो मेरे दोस्तों!
वो रहते हैं  सिर्फ मोहब्बत भरे दिलो में 
क्योंकर होगी जरुरत, उन्हें किसी घर की,
लोग इस हकीकत से अंजान क्यों है...


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दो-चार पल की जिंदगी में शिकन क्यों रुसवाई क्यों ,
प्रेम की तस्वीर पर ये घ्रणा की परछाई क्यों 
सिमटते और एक परिवार होते इस जहाँ में,
आज भी हम कदर  नादान क्यों है..... 
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