मंगलवार, 9 मार्च 2010

एक हाथ में
तितली और एक में लेकर फूल ;
मै खुश हो गयी
और भूल गयी
हर चुभता हुआ शूल ;
बटोर कर रख ली
रत्ती भर चन्दन के साथ
मुट्ठी भर धूल;
पर,
क्या पता था मुझे
तितली उड़ जाएगी
फूल मुरझा जायेगा
चन्दन झरजायेगा,
और मेरे हिस्से रह जाएगी
सिर्फ धूल,
खाली हथेली
और एक सूखा फूल ..
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